बेचैन
आज बेचैन
आगोश के अंजाम से बेचैन
हर अधूरे काम से बेचैन
याद आते हर लम्हे
की कटु जुबां से बेचैन
छलछलाते सपनों के सच से बेचैन
दोस्तों की आँखों के अलविदा से बेचैन .
बेवक्त चैन और रतनारे नैन से बेचैन
घूम रहा मनगढ़ंत सागर और गिरी में
लहरों की सौम्य गहरी सी शान्ति - पर मैं बेचैन.
शायद गहराइयों में डूबे चन्द्रमा की डोर से लटकूँगा.
इस सुदृश सूरज के धधकते तेज़ में .... मैं बेचैन
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